पदबंध Phrase

 पदबंध  Phrase


पदबंध  Phrase



भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण या ध्वनि हैं । दो या दो से अधिक सार्थक ध्वनियों/वर्णों के मेल से एक शब्द का निर्माण होता है । वही शब्द जब वाक्य में प्रयुक्त होता है तो उसे हम पद कहते हैं । 

जब वाक्य में एक से अधिक पद परस्पर मिल कर एक पद के रूप अर्थ देते हैं , किंतु सम्पूर्ण अर्थ नही देते , उन्हें पदबंध या वाक्यांश कहते हैं । अर्थात कई पदों के योग से बना वाक्यांश जो एक इकाई का काम करता है, उसे 'पदबंध' कहते है। 


जैसे 

सबसे अच्छा खेलने वाले खिलाड़ी जीत गया।

राम अत्यंत परिश्रमी व विनीत है ।

रमा दौड़ती चली आ रही है

हवा सांय-सांय करती हुई बह रही थी ।



उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द पदबंध है। पहले वाक्य के 'सबसे अच्छा खेलने वाला खिलाड़ी' में पाँच पद है, किन्तु वे मिलकर एक ही पद अर्थात संज्ञा का कार्य कर रहे हैं। दूसरे वाक्य के 'अत्यंत परिश्रमी व विनीत' में भी चार पद हैं, किन्तु वे मिलकर एक ही पद अर्थात विशेषण का कार्य कर रहे हैं। तीसरे वाक्य के 'दौड़ती चली आ रही है ।' में पाँच पद हैं किन्तु वे मिलकर एक ही पद अर्थात क्रिया का काम कर रहे हैं। चौथे वाक्य के 'सांय-सांय करती हुई' में तीन पद हैं, किन्तु वे मिलकर एक ही पद अर्थात क्रिया विशेषण का काम कर रहे हैं।


रचना की दृष्टि से पदबंध

एक से अधिक पद 

एक मुख्य पद होता है और बाकी पद उस मुख्य पद पर आश्रित होते है।

पद परस्पर इस तरह से मीले होते हैं कि उनसे एक इकाई बन जाती है। 

पदबन्ध किसी वाक्य का अंश होता है , सम्पूर्ण वाक्य नही ।


पदबंध के भेद

मुख्य पद के आधार पर पदबंध के पाँच भेद  हैं -

संज्ञा-पदबंध

सर्वनाम पदबंध

विशेषण-पदबंध

क्रिया पदबंध

क्रिया-विशेषण पदबंध


संज्ञा-पदबंध

जब कोई वाक्यांश वाक्य में संज्ञा की तरह व्यवहृत हो तो , उसे संज्ञा पदबंध कहते हैं । अर्थात पदबंध का मुख्य पद/शब्द यदि संज्ञा हो और अन्य सभी पद उसी पर आश्रित हो तो वह 'संज्ञा पदबंध' कहलाता है।


जैसे

  1. भाग्य हमेशा परिश्रम करने वाले व्यक्ति का ही साथ देता है ।
  2. एक ईमानदार व देशभक्त नेता ही हमारे राष्ट्र का भला कर सकता है ।
  3. अयोध्या के राजा दशरथ के चारों पुत्र वीर व साहसी थे ।
  4. आसमान में उड़ता हुआ हवाई जहाज दुर्घटना ग्रस्त हो गया ।


उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द 'संज्ञा पदबंध' है।



सर्वनाम पदबंध 

जब कोई वाक्यांश वाक्य में सर्वनाम की तरह व्यवहृत हो तो , उसे सर्वनाम पदबंध कहते हैं । अर्थात पदबंध का मुख्य पद/शब्द यदि सर्वनाम हो और अन्य सभी पद उसी पर आश्रित हो तो वह 'सर्वनाम पदबंध' कहलाता है।


जैसे

  1. विदेशों से आये मेहमानों में से कुछ कोरोना पॉजिटिव पाए गए ।
  2. आपके मित्रों में से कोई भी समय पर नही पहुंचा ।
  3. हमारे विद्यालय में पढ़ने वाला वह आज अच्छे पद पर है ।
  4. हमारे बीच बोलने वाले आप कौन होते हैं ।


उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द सर्वनाम पदबंध हैं ।



विशेषण पदबंध 

वह पदबंध जो संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बतलाता हुआ विशेषण का कार्य करे, विशेषण पदबंध कहलाता है। अर्थात पदबंध का मुख्य पद/शब्द यदि विशेषण हो और अन्य सभी पद उसी पर आश्रित हों तो वह 'विशेषण पदबंध' कहलाता है।


जैसे

  1. डीजल गाड़ियों से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है ।
  2. उस मेज पर कक्षा का सबसे होशियार छात्र बैठता है ।
  3. उसका बेटा बहुत सुंदर, फुरतीला और आज्ञाकारी है।
  4. माता-पिता के आशीर्वाद की छांह में हम सबसे सुरक्षित होते हैं ।


उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द 'विशेषण पदबंध' है।


क्रिया पदबंध 

वह वाक्यांश/पदबंध जो अनेक क्रिया-पदों से मिलकर बना हो, क्रिया पदबंध कहलाता है। अर्थात क्रिया पदबंध में मुख्य क्रिया पहले आती है। उसके बाद अन्य क्रियाएँ मिलकर एक  इकाई बनाती है । 


जैसे

  1. राम घर की ओर आया होगा
  2. मैंने राधा को पत्र लिख दिया है ।
  3. गुरुजी आज विद्यालय आ गए थे
  4. सुरेश कीचड़ में धंसता चला गया

उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द 'क्रिया पदबंध' है।


क्रिया-विशेषण पदबंध

वह वाक्यांश/पदबंध जो अनेक क्रिया-विशेषण पदों से मिलकर बना हो, क्रिया-विशेषण पदबंध कहलाता है। अर्थात क्रिया-विशेषण पदबंध में मुख्य क्रिया-विशेषण पहले आता है। 


जैसे

पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष वर्षा अधिक हुई है

मेरे घर से विद्यालय का रास्ता बहुत ज्यादा लम्बा है

मोहन पहले की अपेक्षा अब बहुत होशियार हो गया है

कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है

इन वाक्यों में रेखांकित शब्द क्रिया-विशेषण पदबंध हैं।


पदबन्ध और उपवाक्य में अन्तर

उपवाक्य भी पदबन्ध की तरह पदों का समूह है, लेकिन इससे केवल आंशिक भाव प्रकट होता है, पूरा नहीं। पदबन्ध में क्रिया नहीं होती, उपवाक्य में क्रिया रहती है; जैसे-'ज्योंही वह आया, त्योंही मैं चला गया।' यहाँ 'ज्योंही वह आया' एक उपवाक्य है, जिससे पूर्ण अर्थ का ज्ञान नहीं होता ।


ये भी देखें

 संज्ञा <> सर्वनाम <> विशेषण <> क्रिया <> क्रिया-विशेषण  <> समुच्चयबोधक <> सम्बन्धबोधक , विस्मयादिबोधक , निपात  <> वचन <> काल  <> पुरुष <> वाच्य <> लिंग <> उपसर्ग <> प्रत्यय <> शब्द-विचार <> कारक <> सन्धि <> समास <> पर्यायवाची शब्द <> विलोम शब्द <> वाक्यांश के लिए एक शब्द one word <> एकार्थी प्रतीत होने वाले भिन्नार्थक शब्द <> शब्द-युग्म : समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द  <> वाक्य - विचार vaaky-vichaar भाग-1 <> वाक्य - विचार vaaky-vichaar  भाग-2   <> वाक्य – शुद्धि

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