वाक्य - विचार vaaky-vichaar

 वाक्य - विचार  vaaky-vichaar 



वाक्य - विचार  vaaky-vichaar



भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण/अक्षर है । एक या दो से अधिक वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं तथा शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य । अर्थात् वाक्य शब्द - समूह का यह सार्थक मेल होता है , जिससे उसके अर्थ एवं भाव की पूर्ण एव सुस्पष्ट अभिव्यक्ति होती है । अतः वाक्य में आकांक्षा , योग्यता , आसक्ति एवं क्रम का होना आवश्यक है । 


वाक्य के अंग 

साधारणतः वाक्य के दो अंग माने जाते हैं – 

उद्देश्य  

विधेय 

  • उद्देश्य 

वाक्य में जिसके सम्बन्ध में कहा जाता है , उसे उद्देश्य कहते हैं । अतः कर्ता ही वाक्य में उददेश्य होता है , किन्तु यदि कर्ता कारक के साथ उसका कोई विशेषण हो , उसे कर्ता का विस्तारक कहते हैं , वह उद्देश्य के ही अन्तर्गत आता है । 

जैसे 

मेरी बहिन संजू पढ़ने में बहुत होशियार है ।

इस वाक्य में मेरी बहिन संजू उददेश्य है , जिसमें संजू कर्ता है तो ' मेरी बहिन ' संजू कर्ता का विशेषण अर्थात् इसे कर्ता का विस्तारक कहेंगे । 

  • विधेय

विधेय , अर्थात कर्ता के सम्बन्ध में वाक्य में जो कुछ कहा जाता है , उसे विधेय ' कहते हैं । अतः विधेय के अन्तर्गत वाक्य में प्रयुक्त क्रिया , क्रिया का विस्तारक , कर्म , कर्म का विस्तारक , पूरक तथा पूरक का विस्तारक आदि आते हैं

उपर्युक्त वाक्य में पढ़ने में बहुत होशियार है वाक्यांश विधेय हैं । जिसमें पढ़ने शब्द क्रिया है तो बहुत शब्द क्रिया का विस्तारक ( जो शब्द क्रिया की विशेषता बतलाता है उसे क्रिया का विस्तारक कहते हैं ) । इनके अतिरिक्त यदि कोई शब्द प्रयुक्त होता है या जब वाक्य में क्रिया अपूर्ण होती है तो उसे पूरक कहते हैं तथा पूरक ' की विशेषता बतलाने वाले शब्द को पूरक का विस्तारक कहते हैं ।


वाक्य के भेद 

क्रिया , अर्थ एवं रचना के आधार पर वाक्यों के निम्न भेद होते हैं -

क्रिया की दृष्टि से वाक्य के भेद

क्रिया के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं – 

कर्तृवाच्य
    कर्मवाच्य
      भाववाच्य

      • कर्तृवाच्य

      जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का सीधा व प्रधान सम्बन्ध कर्ता से होता है अर्थात् क्रिया के लिंग , वचन , कर्ता , कारक के अनुसार प्रयुक्त होते हैं उसे कर्तृवाच्य  वाक्य कहते हैं । 

      जैसे

      राम पुस्तक पढ़ता है । 

      राधा पुस्तक पढती है । 

      • कर्मवाच्य

      जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का सीधा सम्बन्ध वाक्य में प्रयुक्त कर्म से होता है अर्थात् क्रिया के लिंग , वचन , कर्ता कारक के अनुसार न होकर कर्म के अनुसार प्रयुक्त होते हैं , उसे कर्मवाच्य  वाक्य कहते हैं । 

      जैसे 

      सुरेश ने गाना गाया । 

      प्रियंका ने गाना गाया । 

      • भाववाच्य  

      जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया न तो कर्ता के अनुसार प्रयुक्त होती है , न ही कर्म के अनुसार बल्कि भाव के अनुसार हो तो उसे भाववाच्य  वाक्य कहते हैं । 

      जैसे

      राज से पढ़ा नहीं जाता । 

      माया से पढ़ा नहीं जाता । 

      अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद

      अर्थ के आधार पर वाक्य 8 प्रकार के होते हैं – 

      विधानार्थक          इच्छार्थक

      निषेधात्मक          सन्देहार्थक

      आज्ञार्थक            संकेतार्थक

      प्रश्नार्थक             विस्मय बोधक

      • विधानार्थक वाक्य

      जिस वाक्य में किसी बात का होना पाया जाता है.उसे विधानार्थक वाक्य कहते हैं । जैसे- सुरेंद्र खेलता है । 

      • निषेधात्मक वाक्य 

      जिस वाक्य में किसी बात के न होने या किसी विषय के अभाव का बोध हो उसे निषेधार्थक वाक्य कहते हैं । जैसे- गरिमा घर पर नहीं है । 

      • आज्ञार्थक वाक्य

      जिस वाक्य में किसी अन्य के द्वारा आज्ञा , उपदेश या आदेश देने का बोध हो , उसे आज्ञार्थक वाक्य कहते हैं । जैसे - मोहन , तुम गाना गाओ । 

      • प्रश्नार्थक वाक्य

      जिस वाक्य में प्रश्नात्मक भाव प्रकट हो अर्थात किसी कार्य या विषय के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने का बोध हो , उसे प्रश्नार्थक वाक्य कहते है । जैसे- कौन जा रहा है ? 

      • इच्छार्थक वाक्य

      जिस वाक्य में इच्छा या आशीर्वाद के भाव का बोध हो , उसे इच्छार्थक वाक्य कहते हैं । जैसे – तुम अच्छे अंको से उत्तीर्ण हो ।

      • संदेहार्थक वाक्य

      जिस वाक्य में सम्भावना या सन्देह का बोध हो उसे संदेहार्थक वाक्य कहते हैं । जैसे -  शायद वो कल आये । 

      • संकेतार्थक वाक्य

      जिस वाक्य में संकेत या शर्त का बोध हो , उसे संकेतार्थक वाक्य कहते हैं । जैसे -  यदि तुम बुलाओ तो मैं आऊँ ।

      • विस्मय बोधक वाक्य

      जिस वाक्य से विस्मय , आश्चर्य आदि का भाव प्रकट हो . उसे विस्मयबोधक वाक्य कहते हैं । जैसे – अरे ! तुम यहाँ ।


      ये भी देखें

       संज्ञा <> सर्वनाम <> विशेषण <> क्रिया <> क्रिया-विशेषण  <> समुच्चयबोधक <> सम्बन्धबोधक , विस्मयादिबोधक , निपात  <> वचन <> काल  <> पुरुष <> वाच्य <> लिंग <> उपसर्ग <> प्रत्यय <> शब्द-विचार <> कारक <> सन्धि <> समास <> पर्यायवाची शब्द <> विलोम शब्द <> वाक्यांश के लिए एक शब्द one word <> एकार्थी प्रतीत होने वाले भिन्नार्थक शब्द <> शब्द-युग्म : समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द 

       

      रचना के आधार पर वाक्य के भेद

      रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं –

      साधारण वाक्य

      मिश्रित वाक्य

      संयुक्त वाक्य

      • साधारण वाक्य

      जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय हो , उसे साधारण वाक्य कहते हैं । जैसे - रमा खाना बना रही है । 

      • मिश्रित वाक्य

      जिस बाक्य में एक प्रधान उपवाक्य तथा एक या एक से अधिक आश्रित उपयाक्य हों , उसे मिश्रित वाक्य कहते हैं ।

      जैसे - गांधी जी ने कहा है कि सदा सत्य बोलो । 

      • प्रधान उपवाक्य

      जो उपवाक्य प्रधान या मुख्य उद्देश्य और मुख्य विधेय से बना हो उसे प्रधान उपवाक्य कहते हैं । 

      उपर्युक्त वाक्य में गांधी जी ने कहा ' प्रधान उपवाक्य है जिसमें गाँधी जी मुख्य उद्देश्य है तो कहा मुख्य विधेय । 

      • आश्रित उपवाक्य

      जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के आश्रित रहता है , उसे आश्रित उपवाक्य कहते हैं । 

      उपर्युक्त वाक्य में ' कि सदा सत्य बोलो । आश्रित उपवाक्य है । 

      आश्रित उपवाक्य के प्रकार

      आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं –

      संज्ञा उपवाक्य

      विशेषण उपवाक्य

      क्रिया विशेषण उपवाक्य

      • संज्ञा उपवाक्य

      जब किसी आश्रित उपवाक्य का प्रयोग प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा के स्थान पर होता है तो उसे संज्ञा उपवाक्य कहते हैं । संज्ञा उपवाक्य का प्रारम्भ प्रायः कि से होता है । 

      उक्त वाक्य में “कि सदा सत्य बोलो” ‘कि’ से प्रारंभ होने के कारण संज्ञा उपवाक्य कहलायेगा । 

      • विशेषण उपवाक्य

      जब कोई आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के किसी संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बतलाये तो उस उपवाक्य को विशेषण उपवाक्य कहते हैं । विशेषण उपवाक्य का प्रारंभ प्रायः जो , जिसका , जिसकी , जिसके आदि में से किसी शब्द से होता हैजैसे - जो विद्वान होते हैं , उनका सभी आदर करते हैं । 

      • क्रिया विशेषण उपवाक्य

      जब कोई आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बतलाये या सूचना दे , उस आश्रित उपवाक्य को क्रिया विशेषण उपवाक्य ' कहते हैं । क्रिया विशेषण उपवाक्य प्रायः यदि , जहाँ , जैसे , यद्यपि , क्योंकि , जय , लय आदि में से किसी शब्द से शुरू होता है जैसे - यदि राम परिश्रम करता , तो अवश्य उत्तीर्ण होता । 

      • संयुक्त वाक्य

      जिस वाक्य में दो या दो से अधिक साधारण वाक्य प्रधान उपवाक्य या समानाधिकरण उपवाक्य , किसी संयोजक शब्द ( तथा , एवं , या , अथवा , और , परन्तु , लेकिन किन्तु , बल्कि , अतः आदि ) से जुड़े हों , उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं । जैसे रमेश जाएगा किंतु रमा नही जाएगी । 

      • समानाविकरण उपवाक्य 

      ऐसे उपवाक्य जो प्रधान उपवाक्य या आश्रित उपवाक्य को समान अधिकार वाला हो उसे समानाधिकरण उपवाक्य कहते हैं ।

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