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हिन्दी व्याकरण-पुरुष Purush

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हिन्दी व्याकरण-पुरुष Purush



किसी संवाद में जो भागीदार होते हैं, उन्हें पुरुष कहा जाता है।

जैसे - 

यह रमेश है । इस वाक्य में वक्ता अपने सामने स्थित किसी व्यक्ति के विषय में बता रहा है । वह इस संवाद में भागीदार है ।

उदाहरण
राम यहाँ आओ ।

इस वाक्य में वक्ता श्रोता को आने के लिए कह रहा है । अतः इसमें वक्ता एवं श्रोता शामिल हैं ।

पुरुष के भेद
उत्तम पुरुष – मैं , हममध्यम पुरुष – तू , तुम , तुम सब , आपअन्य पुरुष – वह , वे , यह , ये , आप , आप सब , राम , रमा 
उत्तम पुरुषयह वक्ता खुद होता है। वक्ता  मैं, मुझे, मुझको, मेरा, मेरी आदि शब्दों का प्रयोग खुद के बारे में बताने के लिए करता है ।

उदाहरण

मेरा नाम प्रभात है ।
मैं कोटा से हूँ ।
मेरा लक्ष्य अध्यापक बनना है ।
मुझे पढ़ना व पढाना पसन्द है ।
मुझको पुस्तकों से प्यार है ।
मेरी पसंदीदा पुस्तक रामचरितमानस है ।
सुधांशु जी मेरे प्रिय अध्यापक हैं ।

उपर्युक्त उदाहरणों में वक्ता ‘मैं’,’मेरे’,’मुझे’, ‘मुझको’,  ‘मेरा’ , ‘मेरी’ आदि शब्दों का प्रयोग करके खुद के बारे में बता रहा है। अतः ये शब्द उत्तम पुरुष की श्रेणी में आयेंगे।

ये भी देखें संज्ञा <> सर्वनाम <&g…

हिन्दी व्याकरण-काल Tense

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हिन्दी व्याकरण-काल Tense


किसी क्रिया के जिस रूप से कार्य करने या होने के समय का ज्ञान होता है उसे 'काल' कहते है।

जैसे-
राम खेल रहा है ।
श्याम पढ़ रहा था ।
गीता कल आएगी ।

पहले वाक्य में क्रिया वर्तमान समय में हो रही है। दूसरे वाक्य में क्रिया भूतकाल की तथा तीसरे वाक्य की क्रिया भविष्यकाल की है । इन वाक्यों की क्रियाओं से कार्य के होने का समय ज्ञात हो रहा है।

काल के भेद- काल के तीन भेद होते है -

वर्तमान काल - जो समय चल रहा है।भूतकाल - जो समय बीत चुका है।भविष्यत काल - जो समय आने वाला है।
वर्तमान कालक्रिया के जिस रूप से वर्तमान में चल रहे समय का बोध होता है, उसे वर्तमान काल कहते है।

जैसे -
मोहन पढ़ रहा है ।
रमा दौड़ रही है ।
माया खाना पका रही है ।

उपर्युक्त उदाहरणों में क्रिया के वर्तमान समय में होने का पता चल रहा है। अतः ये सभी क्रियाएँ वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं।

वर्तमान कल की पहचान वाक्य के अन्त में 'ता, ती, ते, है, हैं' आदि आते है।

वर्तमान काल के भेदसामान्य वर्तमानकालअपूर्ण वर्तमानकाल पूर्ण वर्तमानकालसंदिग्ध वर्तमानकालतत्कालिक वर्तमानकालसंभाव्य वर्तमानकाल
सामान्य वर्तमानकालक्रिया …
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वचन Number

शब्द या शब्दों के जिस रूप से एक या एक से अधिक का बोध हो , उसे  'वचन' कहते है। अर्थात संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध होता है , उसे 'वचन' कहते है। वचन का शाब्दिक अर्थ  'संख्यावचन' है । 'संख्यावचन' को ही संक्षेप में 'वचन' कहते है। वचन का अन्य अर्थ कहना भी है।

जैसे-
राम खेल रहा है ।
बाजार से सब्जियां लाओ ।
श्याम और मोहन आ रहे हैं ।
ट्रेन समय पर है ।

उपर्युक्त वाक्यों में खेल रहा है , सब्जियां , आ रहे हैं , समय पर है  आदि शब्द वाक्य में कर्ता या क्रिया के एक या उससे अधिक होने का बोध करवा रहे हैं ।

वचन के भेद अधिकांश भाषाओं में दो वचन ही होते हैं , किन्तु संस्कृत तथा कुछ और भाषाओं में एक तीसरा द्विवचन भी होता है। हिन्दी में भी वचन दो ही होते हैं ।

एकवचनबहुवचन
एकवचनशब्द के जिस रूप से एक ही व्यक्ति या एक ही वस्तु होने का बोध हो, उसे एकवचन कहते है।

जैसे
लड़का , गाय , स्त्री , घोड़ा , नदी , रुपया , सिपाही , बच्चा , कपड़ा , माँ  , बंदर , शेर , कुत्ता , पुस्तक , कलम , आदि।

बहुवचन शब्द के जिस रूप से एक से अधिक व्यक्ति या वस्त…

हिन्दी व्याकरण-सम्बन्धबोधक , विस्मयादिबोधक , निपात (Interjection, Exclamation , Fall)

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सम्बन्धबोधक , विस्मयादिबोधक , निपात Interjection, Exclamation , Fall



सम्बन्धबोधकवे अव्यय जो संज्ञा या सर्वनाम के बाद आते हैं एवं उनका सम्बन्ध वाक्य के दूसरे शब्दों से बताते हैं , उन्हें सम्बन्धबोधक अव्यय कहते हैं ।

जैसे – 
ओर , अपेक्षा , तुल्य , वास्ते , विशेष , पलटे , जैसे , ऐसे , करके , मारे आदि ।

उदाहरण
कल की अपेक्षा आज ठीक है ।
चीन व भारत के मध्य सीमा को लेकर टकराव चल रहा है ।
बस स्टेण्ड के पास विद्यालय है ।
समय प्रतिकूल हो तो अच्छे-अच्छे हार मान लेते हैं ।

इन उदाहरणों में अपेक्षा , मध्य , पास , प्रतिकूल आदि सम्बन्धबोधक अव्यय हैं ।

सम्बन्धबोधक अव्यय के भेद भाषा की सुविधा की दृष्टि से सम्बन्धबोधक अव्यय के 14 भेद स्वीकार किये गये हैं । जो निम्न हैं –


दिशाबोधक – सामने , ओर , आर-पार , प्रति , तरफ , पार , आस-पास आदि ।
मेरा घर नदी के आस-पास ही है ।


समयबोधक – पहले , बाद , उपरांत , आगे , पूर्व , पीछे आदि ।
भोजन के उपरांत हम फिर मिलेंगे ।


स्थानबोधक – ऊपर , नीचे , मध्य , बाहर , भीतर , सामने , निकट , यहाँ , वहाँ , नजदीक , अंदर आदि ।
पहाड़ के ऊपर मन्दिर है ।

सदृश्यबोधक -  सदृश , बराबर , ऐसा , जैसा , अनु…

हिन्दी व्याकरण - समुच्चयबोधक(योजक) Conjunctive

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हिन्दी व्याकरण - समुच्चयबोधक(योजक) Conjunctive


वे अव्यय जो दो शब्दों , वाक्यों , या वाक्यांशों को जोड़ते हैं , उन्हें समुच्चय बोधक अव्यय या योजक कहते हैं ।
जैसे – राम आया और जयपुर चला गया । वाक्य में ‘राम आया’ ‘जयपुर चला गया’ दो वाक्य हैं , जिन्हें ‘और’ द्वारा जोड़ा गया है अतः यहाँ ‘और’ समुच्चय बोधक या योजक है ।
उदाहरण राम और श्याम खेलते हैं । तुम्हें रामायण या गीता पढ़नी चाहिए । तुम आते तो मिल लेते । मैं कल दिल्ली जाऊंगा इसलिए तुम आ जाओ ।
समुच्चयबोधक के भेदसमानाधिकरण समुच्चयबोधकव्यधिकरण समुच्चयबोधक
समानाधिकरण समुच्चयबोधकवे अव्यय जो मुख्य वाक्यों को जोड़ते हैं उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
जैसे राम खेल रहा था और श्याम पढ़ रहा था । रमा नाचेगी तो गणेश गायेगा । मोहन आया है इसलिए सोहन भी आएगा । 
समानाधिकरण समुच्चयबोधक के भेद
संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधकविभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधकविकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधकविरोधदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधकपरिणामदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधवियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक 
संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधकवे अव्यय जो दो शब्दों , वाक्यों या वाक्यांशों को परस्पर सं…

क्रिया-विशेषण Adverb

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क्रिया-विशेषण Adverb

परिवर्तन या विकार के आधार पर शब्दों के दो भेद किये जा सकते हैं
विकारी शब्द अविकारी शब्द 
विकारी शब्दलिंग , वचन , कारक , पुरुष , काल , आदि के कारण इनके रूप में परिवर्तन होता है।

जैसे - 
संज्ञा , सर्वनाम , क्रिया , विशेषण ।

अविकारी/ अव्यय शब्द“न व्ययेती इति अव्यय”
लिंग , वचन , कारक , पुरुष , काल , आदि के कारण इनके रूप में परिवर्तन नही होता है।
सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु,सर्वासु च विभक्तिषु । वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्ययेति तदव्ययम् ।।

जैसे - 
क्रिया-विशेषण , समुच्चयबोधक , सम्बन्धबोधक , विस्मयादिबोधक

क्रिया-विशेषणजिन शब्दों से क्रिया के अर्थ में विशेषता प्रकट होती है , उन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं ।

श्याम प्रतिदिन पढ़ता है ।
वाक्य में पढ़ना क्रिया की विशेषता प्रतिदिन शब्द से प्रकट हो रही है । अतः इस वाक्य में प्रतिदिन एक क्रिया-विशेषण है ।

उदाहरण
कुछ खेल लो ।
मैट्रो तेज चलती है ।
राम अच्छा लिखता है ।
तुम पीछे चलो ।

इन उदाहरणों में कुछ , तेज , अच्छा ,  पीछे शब्द  खेल लो , चलती , लिखता , चलो क्रिया की विशेषता प्रकट कर रहे हैं । अतः ये शब्द क्रिया-विशेषण हैं ।

क्रिया-विशेषण के भेद क्रिया-…

हिन्दी व्याकरण - क्रिया Verb

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हिन्दी व्याकरण - क्रिया Verb


क्रिया किसी शब्द या शब्द समूह द्वारा किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है , उसे क्रिया कहते हैं ।

जैसे – 
राम भोजन कर रहा है ।
रमा गा रही है ।
सुरेश सो रहा है ।
बच्चा रो रहा है ।
मोहन खेल रहा है ।

उपर्युक्त वाक्यों में कर रहा है , गा रही है , सो रहा है , रो रहा है , खेल रहा है क्रियापद हैं । क्रिया के बिना कोई वाक्य पूर्ण नही होता । प्रत्येक वाक्य में क्रिया होना आवश्यक है । क्रिया के बिना वाक्यांश हो सकता है , पूर्ण वाक्य नही । क्रिया वाक्य को पूर्णता देती है ।

धातुक्रिया का मूलरूप धातु कहलाता है ।

जैसे – खा , पी , गा , जा , चल , लिख आदि ।

धातु के भेदमुलधातुयौगिक धातु
मुलधातुये स्वतंत्र होती हैं , इन्हें किसी भी सहायक शब्द की आवश्यकता नही होती ।

जैसे – जा , चल , सक , सो , हंस आदि ।

यौगिक धातुमूल धातु में प्रत्यय का योग करके , दो या दो से अधिक धातुओं के योग से या संज्ञा या विशेषण में प्रत्यय जुड़ने से बनी धातु को यौगिक धातु कहते हैं

जैसे – खाना , जाना , चलना , उठना , बैठना
             चलवाना , उठवाना , बैठाना , चलना-फिरना , उठना-बैठना , गाना-बजाना आदि ।


य…

हिन्दी व्याकरण - विशेषण Adjective

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हिन्दी व्याकरण - विशेषण Adjective


विशेषणसंज्ञा या सर्वनाम की विशेषता ( गुण , दोष , रंग , आकार-प्रकार , संख्या ) बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं ।

जैसे – काला , लम्बा , चौड़ा , एक किलो , भारी , दयालु , क्रूर , सुन्दर आदि ।

उदाहरण

काला कुत्ता ।
लम्बा सांप ।
एक किलो शक्कर ।
राम बड़ा दयालु है ।
राधा सुंदर है ।

उपर्युक्त वाक्यों में काला , लम्बा , एक किलो , दयालु , सुंदर  शब्द क्रमशः कुत्ता , सांप , शक्कर , राम , राधा की विशेषता बता रहे हैं ।

विशेष्यजिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताई जाती है , उसे विशेष्य कहते हैं । 

ये आम मीठे हैं ।
वे पुष्प सुंदर हैं ।
श्याम होनहार विद्यार्थी है ।

उपर्युक्त वाक्यों में मीठे , सुंदर , होनहार आदि शब्द क्रमशः आम , पुष्प व श्याम आदि संज्ञा शब्दों की विशेषता बता रहे हैं । अतः मीठे , सुंदर व होनहार विशेषण तथा आम , पुष्प व श्याम विशेष्य हैं ।

विशेषण शब्द प्रायः विशेष्य के पहले लगते हैं किंतु कभी-कभी विशेष्य के बाद भी इनका प्रयोग किया जाता है ।

प्रविशेषणवे शब्द जो विशेषणों की विशेषताएं बताएँ , उन्हें प्रविशेषण कहते हैं ।

राम बहुत अच्छा विद्यार्थी है ।
आज बहुत अधि…

हिन्दी व्याकरण - सर्वनाम Pronouns

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हिन्दी व्याकरण - सर्वनाम Pronouns

वे शब्द जो संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं उन्हें सर्वनाम कहते हैं । जैसे -  मैं , तुम , आप , यह , वह , क्या , कुछ , कौन आदि ।
सर्वनाम संज्ञा शब्द की बार-बार आवृत्ति से बचाते हैं । सर्वनामों के प्रयोग से भाषा की सुंदरता में वृद्धि होती है । साथ ही वाक्य सरल व संक्षिप्त भी होता है । यदि सर्वनामों का प्रयोग न करें तो हमें संज्ञा शब्दों का बार-बार प्रयोग करना पड़ेगा जिससे भाषा रूप अटपटा व दुरह हो जाएगा । 

सर्वनाम के उदाहरण – 
राम अच्छा विद्यार्थी है । राम प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा है । राम के पिता किसान है । राम की माँ गृहिणी है । राम की बहिन भी अच्छी पढ़ रही है ।

इन वाक्यों में बार बार ‘राम’ संज्ञा का प्रयोग हुआ है जिससे भाषा का स्वरूप अटपटा हो गया है । वहीं अब यदि हम सर्वनामों का प्रयोग करते हुए वाक्य निर्माण करें तो भाषा सरल , संक्षिप्त व सुंदर हो जाती है –

राम एक अच्छा विद्यार्थी है । वह प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा है । उसके पिता किसान है । उसकी माँ गृहिणी है । उसकी बहिन भी अच्छी पढ़ रही है ।


हिन्दी में मूल सर्वनाम 11 हैं –
मैं , तू , आप , यह , वह ,…

हिन्दी व्याकरण - संज्ञा Hindi grammer - Noun

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हिन्दी व्याकरण - संज्ञा  Hindi grammer - Noun


परिवर्तन या विकार के आधार पर शब्दों के दो भेद किये जा सकते हैं (1) विकारी शब्द (2) अविकारी शब्द । संज्ञा , सर्वनाम , क्रिया , विशेषण विकारी शब्द हैं ।

संज्ञा शब्द की व्युत्पत्ति  संज्ञा शब्द सम उपसर्ग पूर्वक ज्ञा(जानने) धातु से बना है । जिसका शाब्दिक अर्थ है ठीक प्रकार से जानना या ठीक से ज्ञान करवाने वाला । इसका अंग्रेजी पर्याय noun  है ।
संज्ञा की परिभाषासंज्ञा उस विकारी शब्द को कहते हैं जिससे किसी वस्तु , प्राणी , प्राणी , स्थान , गुण , भाव आदि के नाम का बोध होता हो जैसे – पंखा , पुस्तक , कुर्सी , गाय , भैंस , मछली , जयपुर , बीकानेर ,दिल्ली , बचपन , बुढापा , मिठास , अपनत्व आदि ।

संज्ञा विकारी शब्द है तो लिंग , वचन , कारक , पुरुष , काल , आदि के कारण इसके रूप में परिवर्तन होता है।

परिभाषा में प्रयुक्त 'वस्तु' शब्द का प्रयोग व्यापक अर्थ में हुआ है, जो केवल वाणी और पदार्थ का वाचक न होकर उनके धर्मो का सूचक भी है। साधारण अर्थ में 'वस्तु' शब्द का प्रयोग इस अर्थ में नहीं होता ।
संज्ञा के भेद हिन्दी भाषा मे संज्ञा के प्रायः तीन भेद