हिन्दी भाषा शिक्षण की चुनोतियाँ, शिक्षण अधिगम सामग्री, पाठ्यपुस्तक, बहु माध्यम उपागम Difficulties in teaching Hindi language, teaching material, textbooks, multi-media approach

 हिन्दी भाषा शिक्षण की चुनोतियाँ, शिक्षण अधिगम सामग्री, पाठ्यपुस्तक, बहु माध्यम उपागम
Difficulties in teaching Hindi language, teaching material, textbooks, multi-media approach

हिन्दी भाषा शिक्षण की चुनोतियाँ, शिक्षण अधिगम सामग्री, पाठ्यपुस्तक, बहु माध्यम उपागम

हिंदी भाषा शिक्षण की चुनौतियाँ 

प्रत्येक भाषा की अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक और संवेधानिक स्थिति होती है, उसी के अनुरूप उसकी शैक्षिक स्थिति और समस्याएं होती है । हिंदी भाषा का हिन्दी प्रदेशों (उत्तर भारत) में मातृभाषा के रूप में अध्यापन होता है, तो अहिन्दी प्रदेशों (दक्षिणी भारत) में द्वितीय भाषा के रूप में अध्यापन होता है। हिंदी शिक्षक को हिंदी भाषा का अध्यापन करते समय अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है । जो निम्न हैं -

  1. हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि का अभाव 
  2. हिंदी शिक्षक को उचित महत्त्व न देना 
  3. मानक पाठ्य पुस्तकों का अभाव
  4. स्थानीय बोलियों का उच्चारण
  5. व्याकरण की कठिनता
  6. लेखन संबंधी अशुद्धियाँ
  7. वर्तनी संबंधी अशुद्धियां
  8. कक्षा में उच्चारण और वाचन की समस्या
  9. शिक्षण विधियों की अधिकता व दोषपूर्ण शिक्षण विधियाँ 
  10. शिक्षण उपकरणों ( श्रव्य – दृश्य ) का अभाव
  11. कक्षा का आकार एवं विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या 
  12. रोचक पाठ्यक्रम का अभाव
  13. अभिरुचि का अभाव
  14. अहिंदी भाषी क्षेत्रों में योग्य शिक्षकों का अभाव

शिक्षण अधिगम सामग्री

पाठ को ठीक से समझाने के लिए शिक्षक जिन-जिन सामग्रियों का प्रयोग करता है वह शिक्षण सामग्री (instructional materials) या 'शिक्षण-अधिगम सहायक सामग्री' (टीचिंग-लर्निंग एड्स) कहलाती है। इसमें पाठ्यपुस्तक आदि परम्परागत सामग्रियाँ तो हैं ही, एनिमेशन (animation) आदि नयी सामग्री भी इसमें जुड़ गयी है। इन सामग्रियों के माध्यम से सीखा ज्ञान न केवल छात्रों में उत्साह जागृत करता है वरन् सीखे हुए ज्ञान को लंबे समय तक अपने स्मृति पटल में संजोए रखने में भी सहायक होता है। दूसरी और शिक्षक भी अपने अध्यापन के प्रति उत्साहित रहता है। परिणामस्वरूप कक्षा का वातावरण हमेशा सकारात्मक बना रहता है।

वही शिक्षक छात्रों के लिए आदर्श होता है, और उसी शिक्षक का शिक्षण आदर्श शिक्षण कहलाता है जो अपनी पाठ्य सामग्री को इन रोचक सहायक सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत करता है। क्योंकि ये न केवल छात्रों का ध्यान केन्द्रित करती है बल्कि उन्हें उचित प्रेरणा भी देती है चाहे वह वास्तविक वस्तु हो, चित्र, चार्ट या कोई तकनीकी उपकरण सभी से छात्रों के मस्तिष्क में एक बिंब निर्माण करता है। अध्यापन में नवीनता लाने के लिए सहायक सामग्री का प्रयोग शिक्षक के लिए वाँछनीय ही नहीं अनिवार्य भी है।

कार्टर ए गुड के अनुसार

कोई भी ऐसी सामग्री जिसके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को उद्दीप्त किया जा सके, अथवा श्रवणेन्द्रिय संवेदनाओं के द्वारा आगे बढ़ाया जा सके, वह सहायक सामग्री कहलाती है।

शिक्षण अधिगम सामग्री के प्रकार

  • प्रिन्ट सामग्री पाठ्यपुस्तकें, पम्पलेट, हैंड-आउट, अध्ययन-मार्गदर्शिकाएँ, मैनुअल
  • श्रव्य सामग्री यूएसबी ड्राइव, कैसेट, माइक्रोफोन,
  • दृश्य सामग्री चार्ट, वास्तविक वस्तुएँ, फोटोग्राफ, ट्रान्सपैरेन्सी , श्यामपट्ट
  • श्रव्य-दृष्य सामग्री स्लाइड, टेप, फिल्में, टेलीविजन, मल्टिमिडिया, यू-ट्यूब
  • इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ संगणक, ग्राफ दर्शाने वाले कैलकुलेटर, टैबलेट, स्मार्ट फोन

सहायक सामग्री के उद्देश्य

  • पाठ के प्रति छात्रों में रुचि जागृत करना,
  • बालकों में तथ्यात्मक सूचनाओं को रोचक ढंग से प्रस्तुत करना,
  • छात्रों को अधिक क्रियाशील बनाना,
  • जटिल विषयों को भी सरस रूप में प्रस्तुत करना,
  • प्रभावी दृश्य - श्रव्य सामग्री का महत्त्व 
  • कम समय में अधिक सीखना 
  • शिक्षक व छात्र दोनों के लिए समझाने व समझने में आसान 
  • शिक्षक द्वारा विषय के प्रस्तुतीकरण में स्पष्टता व निश्चितता 
  • विषयवस्तु को याद रखने में सहायक 
  • पाठ को रोचक बनाने में सहायक 
  • छात्रों का ध्यान केंद्रित करने में सहायक 

पाठ्यपुस्तक

पाठ्य पुस्तक का कार्य ज्ञान के क्षेत्र को विस्तृत एवं व्यापक करना , अर्जित ज्ञान को हस्तांतरित करना और उसका व्यावहारिक जीवन में उपयोग करना तथा ज्ञान की जिज्ञासा और पिपासा को संतुष्ट करना है । अब हमारे सामने प्रश्न यह है कि पाठ्यपुस्तक क्या है ? इस संदर्भ में इसका सही और उचित उत्तर होगा कि “ जब किसी पुस्तक की रचना शैक्षिक उद्देश्यों , पाठ्यसामग्री और कक्षा स्तर को ध्यान में रखकर क्रमबद्ध रूप में की जाती है तो उसे पाठ्यपुस्तक कहा जाता है । ' 

पाठ्यपुस्तक का महत्त्व 

" हिंदी भाषा शिक्षण ही नहीं सभी विषयों में पाठ्यपुस्तकों को विशिष्ट महत्त्व है । यह महत्त्व शिक्षक एवं शिक्षार्थी दोनों ही दृष्टियों से अहम है । जिसे निम्न बिन्दुओं में रेखांकित किया जा सकता है -

  • शिक्षण की सीमा व विस्तार से अवगत कराना । 
  • कक्षा शिक्षण के लिए आधार 
  • सम्पूर्ण ज्ञान को इकाईयों में बाँटने के लिए शिक्षक का मार्गदर्शन 
  • शिक्षण में एकरूपता लाने के लिए 
  • शिक्षण स्तर में सुधार लाने के लिए 
  • गृहकार्य करने में सहायक तथा शिक्षक की पूरक 

अच्छी पाठ्य पुस्तक के गुण

  • शैक्षिक उद्देश्यों की पूर्ति करें
  • शैक्षिक उद्देश्यों और विषय वस्तु में अनुकूलता विषय वस्तु - कक्षा स्तर , बालकों के मानसिक स्तर एवं उनकी रुचियों के अनुकल हो 
  • विषय वस्तु की व्यवस्था एवं संगठन में क्रमबद्धता हो 
  • जीवन से संबंधित हो 
  • सरल एवं स्पष्ट भाषा एवं भाषा शैली में विविधता 
  • स्पष्ट एवं उद्देश्यपूर्ण चित्र एवं रेखाचित्रों का प्रयोग 
  • अभ्यास प्रश्न संदर्भ सूची पाठ्यपुस्तक का आकार वजन मुद्रण उचित हो 
  • मुख्य पृष्ठ आकर्षक हो 
  • पुस्तक का मूल्य एवं उपलब्धता उचित हो 
  • विशेषज्ञों द्वारा लेखन - सम्पादन 

बहु माध्यम उपागम

इसे शिक्षण का ' मल्टीमीडिया एप्रोच ' भी कहते है । यह शिक्षण का बहुसंचारीय उपागम है । इसमें एक से अधिक से संचार माध्यमों का प्रयोग किया जाता है । इसलिए इसे मल्टीमीडिया उपागम कहते है । इसमें चित्र / आवाज / संगीत / फोटो आदि का प्रयोग किया जाता है । 

बहुमाध्यम उपागम के साधन 

  1. टेपरिकॉर्ड 
  2. ऑडियो - विडियो 
  3. टेलीविजन 
  4. इन्टरनेट

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